Simplifying Train Travel

…इसलिए कभी न करें ये काम!

रेलयात्रा के दौरान इमरजेंसी किसी भी समय उत्पन्न हो सकती है। ऐसे समय में जब आप ट्रेन को रोकना चाहते हैं या ड्राईवर आदि का ध्यान संकट की ओर आकर्षित करना चाहते हैं। तबए ऐसी आपात स्थिति में रेलयात्रा के लिए यही विकल्प होता है: ट्रेन को रोकने के लिएए चेन खींचें! क्योंकि ट्रेन के गार्ड और लोको पायलट आदि से मदद मांगने के लिए, उनतक पहुँच पाना असंभव होता है। इसे ध्यान में रखते हुए प्रत्येक ट्रेन कोच में  इमरजेंसी अलार्म  चेन से बंधा होता है, एवं जब इसे खीच लिया जाता है तो यह एक चलती ट्रेन को स्तब्ध कर सकता है। हालाँकि हममें से ज़्यादातर व्यक्ति इमरजेंसी चेन खींचने से जुड़ी इन बातों के बारे में जानता हैं। मगर हमारें इस ब्लॉग में हम चेन खींचने से जुड़ें अन्य कई संदेहों को भी दूर करने का प्रयास करेंगे।

जब कोई यात्री चेन खीचता है तो ट्रेन कैसे रुक जाती है?

Indian Railway rules

अलार्म चेन ट्रेन के मुख्य ब्रेक पाइप से जुड़ी होती है। यह ब्रेक पाइप एक स्थिर वायुदाब को बनाए रखती हैए जिससे कि ट्रेन आसानी से चलती है। जब इमरजेंसी चेन खीची जाती है, तो ब्रेक पाइप में जमी हवा एक छोटे से छिद्र के माध्यम से निकलती है। हवा के दबाव में गिरावट से ट्रेन की गति धीमी हो जाती है। लोको पायलट जल्दी ही इस हवा के दबाव में नोटिस करता है और इसकी जाँच शु: करता है। चूंकि ट्रेन संकीर्ण पटरियों पर चलती है, इसलिए इसे अचानक खड़े नहीं किया जा सकता है, इससे वह असंतुलित हो सकती है।

नोट : 110 किमी घंटा की गति से चलने वाली ट्रेन पूरी तरह से चेन खिचनें के 3.4 मिनट के भीतर बंद हो सकती है।

एक कोच में कितनी इमरजेंसी चेन होते हैं?

अतीत में, कोच के दोनों तरफ दीवारों पर चेन होती थी। लेकिन, हाल के दिनों में भारतीय रेलवे ने इसकी संख्या में (उनके दुरुपयोग के कारण) कटौती की है। आज, सिर्फ एक चेन होती है, जो ज्यादातर प्रत्येक कोच के मध्यभाग में स्थित होती है।

क्या लोको पायलट ट्रेन में आपातकालीन ब्रेकिंग सिस्टम को ओवरराइड कर सकता है?

जी हां, लोको पायलट केवल कुछ स्थितियों में आपातकालीन ब्रेक को ओवरराइड कर सकता है। ओवरराइडिंग तर्क के पीछे कुछ ऐतिहासिक घटनाएं शामिल है। पुराने दिनों में, जब डकैतों का बड़ा खतरा था, तो लोको पायलटों को उनके क्षेत्रों से गुज़रने के दौरान आपातकालीन ब्रेक को ओवरराइड करने के लिए स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। लेकिन आज कुछ नियम बदल दिए गए हैं। यदि वर्तमान में लोको पायलट ट्रेन में आपातकालीन ब्रेकिंग सिस्टम को ओवरराइड करता है, तो वह व्यक्ति इस तरह की कार्रवाई के लिए उच्च अधिकारियों के लिए उत्तरदायी है।

आरपीएफ कैसे जानती है कि चेन किसने खीची ?

IRCTC Rules

जैसे ही चेन खीची जाती है, आरपीएफ कर्मी उस कोच तक पहुंच जाते हैं। यह वाकई में आश्चर्यचकित करता है. कैसे? खैर, कोच की दीवारों पर इमरजेंसी फ्लैशर्स लगाए जाते हैं। कोच से फ्लैशर्स जिसमें चेन खीचा गया था जैसे ही इमरजेंसी चेन खीची जाती है, सक्रिय हो जाती है। एक रौशनी भी लोकोमोटिव पायलट के नियंत्रण कक्ष में ब्लिंक करना शुरू कर देती है ऐसा तब तक होता है जबतक कि गार्ड, सहायक चालक और आरपीएफकर्मी चेन खीचने वाले कोच तक पहुँच नहीं जाते और मैन्युअली चेन को रीसेट नहीं कर देते। एक बार चेन रीसेट हो जाने के बाद, वायुदाब धीरे-धीरे सामान्य हो जाता है और ट्रेन चलने के लिए तैयार हो जाती है।

नोट: हालाँकि इमरजेंसी फ्लैशर्स यह ज़रूर बता सकते हैं कि किस कोच में चेन खीची गयी थी, मगर वह यह नहीं बता सकते कि चेन को किसने खीच था। इसके लिए आरपीएफ यात्रियों से पूछताछ कर सकती है।

चेन खीचने की क्या सजा है?

वैध कारणों के बिना चेन खीचना, भारतीय रेलवे अधिनियम की धारा 141 के तहत एक दंडनीय अपराध है। रेलवे अधिनियम के 141 के मुताबिक, यदि यात्री किसी भी पर्याप्त कारण के बिना ट्रेन और यात्रियों के प्रभारी रेलवेकर्मियों के बीच हस्तक्षेप का कारण बनता है तो व्यक्ति को दोषी ठहराया जाएगा। दोष साबित होने पर व्यक्ति को एक वर्ष का कारावास या जुर्माना के साथ दंड भी दिया जा सकता है जो 1000 रुपये तक हो सकता है।

नोट: दोषी साबित होने पर न्यूनतम सजा रु 500 (पहले अपराध के लिए) या तीन महीने दूसरे या बाद के कारावास से कम नहीं होनी चाहिए।

चलती गाड़ी में चेन खीचने के लिए स्वीकार्य स्थितियां कौन-कौन सी है?

Railway Rules

इमरजेंसी चेन यात्रियों को उनकी आपात स्थिति के दौरान मदद करने के लिए पेश की गई थी। ट्रेन में चेन खीचने के लिए स्वीकार्य स्थितियों में से कुछ में शामिल हैं. एक साथी यात्री का चलती ट्रेन से गिर जाना, ट्रेन में आगजनी की घटना, किसी सदस्य यात्री का स्टेशन पर छूट जाना, वृद्ध, बीमार यात्री को चढ़ाने-उतारने के लिए अतिरिक्त समय (अन्य चिकित्सिय आपात स्थितियां जब कोच के भीतर एक यात्री को तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता होती है) सुरक्षा आपात स्थिति चोरी, डकैती, छापे, इत्यादि जैसी घटनाएं। आपातकालीन स्थिति के अन्य उदाहरण सक्षम रेलवे अधिकारियों द्वारा मूल्यांकन के बाद चेन खीचने के वैध कारणों के रुप में परिभाषित किए जा सकते हैं।

नोट: एक यात्री के लिए ट्रेन के प्रस्थान में देरी करने के लिए चेन खीचना जो अभी तक जहाज पर नहीं है, वह दंडनीय अपराध है।

क्या चेन खीचने से ट्रेन को किसी भी प्रकार की क्षति हो सकती है?

यदि इमरजेंसी चेन खीची जाती है, जब ट्रेन धीमी गति से होती है, तो ट्रेन को कोई नुकसान नहीं होगा। इसके विपरीत, अगर रेलगाड़ी बहुत तेज़ गति से चल रही है तो ट्रेन के डीरेल होने की उच्च संभावना है। इसके अलावा, एक ट्रेन का अचानक रुकना (चेन खीचने के कारण) एक विलंब प्रतिक्रिया शुरु कर सकता हैं। यह न केवल उस ट्रेन को देरी कराता है जिस पर आप सवार हैं, बल्कि उस रेलमार्ग पर यात्रा करने वाली अगली ट्रेनों में भी देरी की स्थिति उत्पन्न कर सकता है।

चेन खीचने के कारण हुई ट्रेन दुर्घटना !

फ्रांसीसी रेलवे के इतिहास में सबसे बड़ी ट्रेन दुर्घटनाओं में से एक ट्रेन दुर्घटना चेन खीचने के कारण हुई थी। 27 जून 1988 को एक गारे डी ल्योन टर्मिनल ट्रेन एक खड़ी ट्रेन से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस दुर्घटना में 56 लोग मारे गए थे। दुर्घटना से कुछ दिन पहले ट्रेन की समय-सारणी में बदलाव किया गया था। इसका मतलब था कि ट्रेन का अब मार्ग के कुछ  स्टेशनों पर ठहराव नहीं है। इसलिए, जब ट्रेन एक ऐसे स्टेशन से गुज़र रही थी जहां ठहराव नहीं था, तो एक यात्री ने चेन खीचने का फैसला किया। जैसे ही ट्रेन अचानक धीमी हो गई, इस यात्री ने ट्रेन से छलांग लगा दी। लेकिन ट्रेन अपनी गति को नियंत्रित नहीं कर सकी और जल्द ही दुर्घटनाग्रस्त हो गई। तो, इससे पहले कि आप चेन खीचे, हमेशा सोचे कि आपका ये तरीका दूसरों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।

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2 thoughts on “…इसलिए कभी न करें ये काम!

  1. Deepak Shastri

    Excellent feed back .This should be a part of student ‘s curriculum as a part of SAFETY with responsibility in life

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  2. Arun Kumar Nishad

    Sir Sabse jyada chain puling gutkha bechne wale karte hai.ye bade station aane se pehle chain Puling karke utar jate hai aur bolne patthar marte hai.

    Comment

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