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देखने से पहले यहाँ पढ़िए चन्द्रकांता की दास्ताँ

By Manoj Tiwari

सोनभद्र ( उत्तर प्रदेश) के राबर्ट्सगंज से तकरीबन 30 किमी दूर ऊंचे पहाड़ों पर स्थित विजयगढ़ का किला आज भी लोगों को अपने तिलिस्मिय आकर्षण से हैरान कर देता है। यह वही किला है जिस पर महान उपन्यासकार देवकीनंदन खत्री ने चंद्रकांता उपन्यास लिखा था। दरअसल टीवी सीरियल चन्द्रकान्ता की खूबसूरत नायिका राजकुमारी चंद्रकांता विजयगढ़ की ही राजकुमारी थीं। प्रचलित कहानी के अनुसार विजयगढ़ के पास नवगढ़ (चंदौली) के राजकुमार वीरेंद्र सिंह को विजयगढ़ की राजकुमारी चंद्रकांता से प्रेम हो गया था। लेकिन दोनों राज परिवारों के बीच दुश्मनी थी।

विजयगढ़ का दुर्ग

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तकरीबन चार सौ फीट ऊंचे पहाड़ पर हरियाली की गोद में स्थित ये रहस्यमयी किला अपनी आसमानी ऊंचाई से यहाँ आने वालों का रोमांच स्वत: ही बढ़ा देता है। मऊगांव में बने इस किले तक सड़क के अलावा सीढ़ीनुमा रास्तों से भी होकर पैदल भी पहुंचा जा सकता है। यहां महात्मा बुद्ध से जुड़े कुछ दुर्लभ अवशेष भी देखने को मिलते हैं। किले में प्रवेश करते ही सामने एक विशाल मैदान है। किले की प्राचीनता के बारे में हालांकि बहुत प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन इतिहासकारों का मानना है कि इसका निर्माण पांचवी सदी में कोल राजाओं ने कराया था। वहीँ कुछ इतिहासकारों का दावा है कि इसका निर्माण पंद्रह सौ वर्ष पूर्व में भट्ट शासकों ने करवाया था। कालांतर में कई राजाओं ने इस पर शासन किया था। काशी के राज चेतसिंह ब्रिटिशकाल तक इस किले पर काबिज थे। चंदेलों के द्वारा भी यहाँ का राज-काज संभालने का उल्लेख है। कहा जाता है कि कोल वंश के राजा समय-समय पर किले का जीर्णोद्धार भी कराते रहते थे।

दर्शनीय सप्त सरोवर

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यहाँ के सप्त सरोवर आज भी दर्शनीय हैं। काफी ऊँचाई पर होने के बाद भी इनमें पानी कहाँ से आता है और दो सरोवरों रामसागर और मीरसागर में कैसे पानी कभी नहीं सूखता यह वाकई एक रहस्य है। रामसागर को लेकर तो कई दन्त कथायें भी प्रचलित हैं। कहते हैं कि इसमें हाथ डालने पर कभी-कभी बर्तन मिल जाया करते थे और लोग उसी में खाना बनाते थे। वहीँ आज भी इसकी गहराई का अंदाजा नहीं लगाया जा सका है। लोगों ने यहां मौजूद सरोवरों को भी हिन्दू और मुसलमान नाम दें रखे है। जिसके आधार पर एक का नाम रामसागर है एवं दूसरे का मीरसागर है।

किले में एक मज़ार और शिवालय भी है। यहाँ मौजूद मज़ार के बारे में कहा जाता है की ये मुस्लिम संत सैय्यद जैन-उल अबदीन मीर साहिब की कब्र है, जो हज़रत मीरान साहिब बाबा के नाम से प्रख्यात है। हर साल अप्रैल के महीनें में यहाँ सालाना उर्स का आयोजन होता है। उर्स के मेले में सभी धर्म के लोग शामिल होते हैं। वहीँ शिवालय में भी हर साल सावन में लोग कांवर चढ़ाने आते हैं। सभी कांवरिये रामसागर से जल भरकर भगवान शिव पर चढ़ाते हैं।

दबा हुआ है अकूत खज़ाना

स्थानीय लोगों के अनुसार इस किले के नीचे एक और किला है, जहाँ अकूत खज़ाना दबा हुआ है। खजाना खोजने के लिए कई बार आधी रात में लोगों को मशाल लेकर किले की ओर जाते देखा गया हैं।

वर्तमान स्थिति 

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हालांकि वर्तमान में इस दुर्ग की स्थिति बहुत खराब है मगर गुप्त गुफाओं में उकेरे गये शिलालेख और नक्काशी यहाँ आने वाले पर्यटकों का ध्यान अनायास ही अपनी ओर खींच लेंती है। जो इसके इतिहास को तो बयां करती ही हैं साथ ही इसके रख-रखाव पर एक बड़ा प्रश्न चिन्ह भी लगाती हैं। ज़रूरत है इस अमूल्य धरोहर को संरक्षित करने की क्योंकि जिस प्रकार से यह किला एक खंडहर में तब्दील होता जा रहा है, इससे तो यही लगता है की कुछ सालों बाद ये टूटकर बिखरे हुए पत्थरों का ढेर बन जायेगा।

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10 thoughts on “देखने से पहले यहाँ पढ़िए चन्द्रकांता की दास्ताँ

  1. Ritesh jaiswal

    रोमांच से भरपूर और रोचक वर्णन। सराहनीय

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  2. Padma srivastava

    Srkar se ye request hai ki wo iski suraksha k lie koi upay kre jisse hmare sb aitihasik ngr surkshit rhe

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