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Vikash Makkar

पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट व मुख्यधारा की पत्रकारिता के अनुभवी विकास को कविता, ग़ज़ल, कहानिया लिखने -पढ़ने का शौंक है। उनका मानना है कि ईमानदारी से अपना परिचय देना यक़ीनन एक मुश्किल काम है। वे बस इतना कहते है कि “मैं एक बहुत ही साधारण किस्म का इन्सान हूँ  अगर कुछ ख़ास है मेरे बारे में कहने को तो वो है मेरा “साधारण” होना। एक बीमारी भी है “सोचने की बीमारी” मैं खुद को इससे बचा ही नहीं पाता “जो चल रहा है” “जो घट रहा है” मैं भी उसी को जीता हूँ, भोगता हूँ, जहाँ तक सब देखते है बस मैं उससे थोड़ा आगे देखने की कोशिश करता हूँ। गहराइयों में उतरने की आदत है मेरी हालाँकि ज़्यादातर लोग इससे डरते है, बचते है,  डूबने का खतरा जो होता है। लेकिन मैं अपनी कोशिश जारी रखता हूँ”।


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