Insights into simplifying train travel

यहाँ का स्वाद है निराला- कहानी अनोखे रेस्टोरेंट की !

रेस्टोरेंट में खाना हम सब का पसंदीदा शौक होता है। आज के समय में शायद ही कोर्इ इंसान ऐसा होगा जिसे रेस्टोरेंट जाना, वहाँ खाना-पीना ना पसंद हों। कभी अकेले तो कभी परिवार के साथ या फिर कभी दोस्तों, सहकर्मियों के साथ खाना-खिलाना आज हम सब की आदत में शामिल है। ऐसे में हम हमेशा अच्छे से अच्छे रेस्टोरेंट की तलाश में होते है। जहाँ का खाना स्वादिष्ट एवं पूरी स्वच्छता व अतिथि सत्कार के साथ परोसा जाए। अगर बात आज के बदलते टेस्ट की करें तो वर्तमान में इन दो खूबियों के अलावा ऐसी एक और चीज भी है जिसकी तलाशा रेस्टोरेंट में खाना खाने आए हर मेहमान को होती है। ये चीज है रेस्टोरेंट के लजी़ज खाने और मेहमानवाज़ी के अलावा उसका किसी और मायनें में बाकी के रेस्टोरेंट से अलग होना, अनोखा होना। जो इसके आकर्षण का मुख्य केन्द्र होता है। भारत में भी ऐसे कर्इ रेस्टोरेंट मौजुद है जो अपने लजी़ज खाने और मेहमानवाज़ी के अलावा अपनी किसी और अनूठे स्वाद के लिए देश-दुनिया में नाम बंटोरने में लगे हुए है। रेलयात्री डाटइन पर पढि़ए भारत के ऐसे ही कुछ चुनिंदा रेस्टोरेंट के बारे में-

Coffin-blog-011) न्यू लक्की रेस्टोरेंट– गुजरात के अहमदाबाद शहर के बीचों-बीच बना ये रेस्टोरेंट बाहर से देखने में भले ही आपको साधारण लगे लेकिन इसके अन्दर जाते ही आपको अपनी आँखों पर यकीन करना मुशिकल हो जाएगा। जिसका कारण है रेस्टोरेंट के अन्दर मौजुद 12 कब्र! जिनके बारें में रेस्टोरेंट के मालिक कृष्णन कुटटी बताते है कि जब उन्होंने ये जमीन खरीदी तो ये सारी कब्रें वही मौजुद थी। शुरूआत में कृष्णन के लिए वहाँ स्टोरेंट खोलना मुशिकल काम था। वो सारी कब्रों को वहाँ से हटा देना चाहते थे। फिर जल्द ही उन्होंने अपना फैसला बदल लिया। उन्होनें वहाँ मौजुद 12 कब्रों को हटाए बिना ही अपने रेस्टोरेंट की शुरूआत की। उनका ये लीक से हट कर किया गया अनूठा प्रयास रंग लाया और आज न्यू लक्की रेस्टोरेंट पूरी दुनिया में इसी बात को लेकर चर्चा में है। यहाँ आने वाले मेहमानों के लिए यहाँ मौजुद कब्रों के पास बैठ कर खाना किसी रोमांच से कम नहीं हैं। पिछले 50 सालों से ये रेस्टोरेंट बदस्तूर अपने मेहमानों की खातिरदारी में लगा हुआ है। यहाँ बूढे-नौजवान सभी अपने परिवार, दोस्तों के साथ खाने-पीने और मौज मस्ती करने आते है।

madhuri-blog-032) मनोहर चाट– भारत में रहने वाला शायद ही कोर्इ ऐसा भारतीय होगा जिसे बालीवुड की फिल्मों का शौक ना हो, जिसे हिन्दी फिल्मों के सितारे पसंद ना हो। एक को खोजो हज़ार मिलेंगे। बात जब जुनून की हद तक किसी बालीवुड के सितारे को पसंद करने की हो तो जमशेदपुर के पप्पू सरदार का नाम उन गिने-चुनें लोगों में शुमार है जिनका इस मामले में कोर्इ सानी नहीं। जमशेदपुर के साकची बाजार के मनोहर चाट के मालिक पप्पू सरदार पिछले 20 बरसों से फिल्म अभिनेत्री माधुरी दीक्षित के मुरीद (फैन) है। पप्पू के रेस्टोरेंट मनोहर चाट में आपको भगवान की तस्वीरें कम माधुरी दीक्षित के पोस्टर्स ज्यादा देखने को मिलेगें। जहाँ नज़र दौड़ाइए वहीं मुस्कराती माधुरी के बडे़-बडे़ पोस्टर्स नजर आएंगे यहाँ तक की रेस्टोरेंट के पूजा स्थल में भी। यहाँ आपके कानों में भी सिर्फ माधुरी की फिल्मों के ही कर्णप्रिय गीत सुनार्इ पड़ेगे। पप्पू की दीवानगी का आलम यहीं नही थमता वे हर साल 15 मर्इ को माधुरी दीक्षित का जन्मदिन भी बड़ी धूमधाम के साथ मनाते है। जिसमें सारे जमशेदपुर शहर को न्यौता दिया जाता है। इस दिन पप्पू सरदार माधुरी दीक्षित के नाम पर चैरिटी-डोनेशन (दान) भी करते है। कभी किसी अनाथआश्रम के बच्चों के लिए, तो कभी वृद्धा आश्रम में रहने वाले  के लिए। वही जमशेदपुर के हजारों लोगों को भी अब इस दिन का इंतजार बड़ी बेसब्री से रहता है। जब उन्हें पप्पू की ज़ायकेदार चाट के साथ माधुरी के जन्मदिन का केक भी खाने को मिलता है। अपनी इसी अनोखी बात को लेकर पप्पू सरदार और उनका रेस्टोरेंट मनोहर चाट आज पूरे भारत में अपनी एक अलग पहचान बना चुका है।

udaipur-blog-05

3)मिलिट आफ मेवाड़– अपने गौरवशाली इतिहास, संस्कृति और आकर्षक पर्यटन स्थलों के लिए मशहूर झीलों के शहर उदयपुर का मिलिट आफ मेवाड़ रेस्टोरेंट यहाँ आने वाले देशी विदेशी सैलानियों की पहली पसंद बनता जा रहा है। जिसकी वजह है। सैलानियों को यहाँ मिलने वाला अनोखा अनुभव जो शायद ही उन्हें हिन्दुस्तान के किसी और रेस्टोरेंट में मिल पाए। मिलिट आफ मेवाड़ में परोसे जाने वाले विभिन्न प्रकार के व्यंजनों को पकाने में सफार्इ से लेकर सेहत तक का ख्याल जहां पूरी पाबंदी के साथ रखा जाता है। वही यहाँ आपको मिलेगी एक अच्छी-ख़ासी लार्इब्रेरी जिसमें रखी सैकडो़ं किताबों को पढ़कर यहाँ आने वाले मेहमान अपना ज्ञान बढ़ाते है। यहाँ भारत के इतिहास और पर्यटन स्थलों से जुड़ी कर्इ किताबें विदेशी सैलानियों को भारत के बारे में जानने के लिए विशेष रूप से उपलब्ध है। वही दुनिया भर में शायद ही ऐसा कोर्इ रेस्टोरेंट होगा जो अपने लाजवाब खाने की सीक्रेट रेसिपी किसी के साथ सांझा करने को तैयार हो। मगर मिलिट आफ मेवाड़ में ऐसा नहीं है। यहाँ आप जो खाते है उस व्यंजन को बनाना भी सीख सकते है। रेस्टोरेंट के द्वारा इसके लिए स्पेशल कुकिंग क्लासेज़ दी जाती है। इसके लिए आपको बस कुछ सामान्य शर्तो को पूरा करना होगा। वही आने वाले मेहमानों को खास कर विदेशी सैलानियों को यहाँ के व्यंजनो में मिलाए जाने वाले भारतीय मसालों के बारे में भी शिक्षित किया जाता है। रेस्टोरेंट के कुछ कर्मचारी बकायदा एक मेज़ पर भारतीय मसालों की प्रदर्शनी लगा कर इसी काम में लगे रहते है। मेहमानों को यहाँ मिलने वाला अनुभव उन्हें किसी भी दूसरे रेस्टोरेंट के मुकाबले अनोखा एवं यादगार स्वाद देता है।

tihar-blog-044) तिहाड़ फूड कोर्ट– जरा सोचिए आप किसी ऐसे रेस्टोरेंट में जाते है जहाँ आपके आस-पास मौजूद कर्इ लोग कुख्यात अपराधी रह चुके हो। ऐसे में आपकी पहली प्रतिक्रिया क्या होगी? जाहिर है आप डर जाएंगे और जल्द से जल्द वहाँ से निकलना चाहेंगे। जबकि दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी तिहाड़ जेल के पशिचम दिल्ली के जेल रोड के तिहाड़ फूड कोर्ट में ऐसा नहीं है। तिहाड़ जेल में सज़ा काट रहे कैदियों को उनके आने वाले कल के लिए नर्इ राह दिखाते हुए जेल प्रशासन ने तिहाड़ फूड कोर्ट की शुरूआत की। इस रेस्टोरेंट में आप किसी भी दिन खाने के लिए जा सकते है। बेहतरीन खाने के साथ ही आपकी मेहमानवाजी भी यहाँ पूरे पेशेवर तरीके से की जाएगी। जेल प्रशासन के द्वारा तिहाड़ फूड कोर्ट के सभी स्टाफ कैदियों को होटल मैनेजमेंट की पेशेवर ट्रेनिंग दिलवार्इ गर्इ है। जेल प्रशासन का ये प्रयास कैदियों के पुर्नवासन को लेकर चलाए जा रहे कार्यक्रम का हिस्सा है। 40-50 लोगों के बैठने के पूरे इंतजाम के साथ यहाँ आपको 10 रू के स्नैक्स से लेकर 150 तक कि थाली भी मिल जाएगी। आजकल कर्इ लोग इस रेस्टोरेंट में अपने छोटे-मोटे कार्यक्रम जैसे कि बर्थडे पार्टी, क्लाइंट मीटिंग इत्यादि भी आयोजित कर रहे है। कैदियों के हाथों से बनाए गए लजीज़ व्यंजनों को खाकर यहाँ आने वाले लोगा को जहाँ एक अलग प्रकार का अनुभव मिलता है वहीं सालों से जेल में बंद रहे कैदियों द्वारा समाज की मुख्य धारा में वापस लौटने की ये सार्थक पहल काबिले तारीफ है।

stock-blog-025) दी बार स्टाक एक्सचेज– अक्सर पीने-पिलाने वाले लोग इस पर होने वाले खर्च के बारे में नहीं सोचते। ये लोग अपने इस नापसंद शौक की खातिर हर महीने हजारों रूपये इस पर लुटा देते है। वही ऐसे लोगों को अर्थव्यवस्था के मांग एवं पूर्ति के सूत्र को अच्छी तरह से समझाने व स्टाक मार्केट के रोज गिरते-चढ़ते माहौल से रूबरू कराने के लिए मुम्बर्इ के बार-कम- रेस्टोरेंट ‘दी बार स्टाक एक्सचेज’ ने उनके यहाँ बेचे जाने वाले डि्रंक्स के दाम भी इकोनामिक्स के सप्लार्इ और डिमांड के फामूर्ले के तर्ज पर रख दिए है। जिसके मुताबिक यहाँ मिलने वाली डि्रंक्स के दाम फिक्स नहीं है। उनके दाम उसकी डिमांड के बढ़ने-घटने पर ऊपर-नीचे होते रहते है। यानि की यहाँ हर रोज़ शाम के गहराते ही जब किसी डि्रंक्स की मांग बढ़ती जाती है। उसके दाम में भी वैसे-वैसे इज़ाफा होते जाता है। हांलाकि यही डि्रंक्स आपको ‘मार्केट’ यानि की रेस्टोरेंट के खुलते ही या फिर आधी रात को इसके बंद होते वक्त काफी कम दाम में मिल जाएगे। धीरे-धीरे ये रेस्टोरेंट अपने अनोखे प्रार्इज सिस्टम को लेकर लोगों के बीच फेमस होता जा रहा है। वही डि्रंक्स के दाम का मजा स्टाक मार्केट के उतार-चढाव की तर्ज पर लेने वालो की भीड़ भी यहाँ दिनों-दिन बढ़ती जा रही है।


Leave a Comment

Required fields are marked *